विवेकानंद ने भारतीयों के आत्मगौरव को जागृत किया - श्री नरसिम्हन

स्वामी विवेकानंद की 146वीं जयंती के अवसर पर कल रायपुर में रामकृष्ण मिषन आश्रम द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रदेष के राज्यपाल श्री ई.एस.एल. नरसिम्हन ने कहा कि स्वामी विवेकानंद देश की महान आत्मा, महान संत और महामानव थे। युग पुरूष स्वामी विवेकानंद ने भारतवासियों में आत्मगौरव की भावना को जगाने, उसे प्रेरित करने, अपनी संस्कृति, इतिहास और आध्यात्मिक परम्पराओं के अनुरूप बनाने का कार्य किया।

श्री नरसिम्हन ने विवेकानंद महाविद्यालय चेन्नई की यादों को स्मरण करते हुए कहा कि मैं भी विविध गतिविधियों में भाग लिया करता था। मंच पर जो भी वक्ता स्वामी विवेकानंद के विचारों पर भाषण देता है स्वामी जी स्वयं उनके हृदय में प्रवेष कर जाते हैं और शब्द उनके ही होते हैं और स्वामी विवेकानंद पर बोलने वाले वक्ता के ऊर्जा का रहस्य यही है। कवि रविन्द्र नाथ टैगोर के कथन का उल्लेख करते हुए कहा कि 'यदि कोई भारत को समझना चाहता है तो उसे विवेकानंद से जुड़े साहित्य अवष्य पढ़ना चाहिए।

राज्यपाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि स्वामी विवेकानंद के कार्य और आदर्ष मानवता की धरोहर है। देष के पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू ने एक बार कहा था, ''यदि आप स्वामी विवेकानंद की रचनाओं तथा व्याख्यानों को पढ़े तो आप उनमें एक अदभुत बात पाएंगे कि वे कभी पुराने नहीं लगते। इसका कारण यह है कि उन्होंने जो कुछ भी लिखा या कहा वह हमारी या विश्व की समस्याओं के मूलभूत पहलुओं से संबंधित है। श्री नरसिम्हन ने कहा कि स्वामी जी ने अनुभव किया था कि देश की दुर्दशा का एक बहुत बड़ा कारण गरीबी है और इसीलिए देश की गरीबी को दूर करने के लिए उन्होंने निरन्तर प्रयास किया। उन्होंने कर्म पर बल दिया और कहा कि जब व्यक्ति का कर्म पूजा बन जाता है तो उसके लिए मंदिर और प्रयोग में कोई फर्क नहीं रह जाता। उन्होंने कहा 'उत्तिाष्ठ जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत' अर्थात् उठो, जागो, जब तक इच्छित वस्तु को प्राप्त नहीं कर लेते, तब तक बराबर उसकी ओर बढ़ते जाओ।' स्वामी विवेकानंद जी का यह आह्वान मंत्र हम सभी के लिए है।

श्री नरसिम्हन ने कहा कि स्वामी जी ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा है कि देष को वीरों की आवष्यकता है, अत: वीर बनो। पर्वत की भांति अडिग रहो। 'सत्यमेव जयते' -सत्य की ही सदैव विजय होती है। स्वामी विवेकानंद ने पूजा-पाठ से भी ज्यादा जोर सेवा पर दिया। वे केवल व्याख्यान देकर ही नहीं रूके। वे आदर्ष संगठनकर्ता भी थे। उन्होंने अपने गुरूदेव के कार्य को आगे चलाने के लिए एक स्थायी संस्था स्थापित करने का विचार किया और रामकृष्ण मठ एवं रामकृष्ण मिषन की स्थापना की। मिषन की जो बात सबसे ज्यादा प्रभावित करती है, वह है सेवा पर व्यापक जोर। सेवा कार्य के द्वारा ही हमारी आत्मोन्नति होगी। उन्होंने हमेषा दाता का आसन ग्रहण करने पर जोर दिया और कहा कि सर्वस्व दे दो पर बदले में कुछ न चाहो। आज के वातावरण में स्वामी विवेकानंद जी के विचारों को और अधिक समझने और प्रचार-प्रसार करने की जरूरत है। आज हमारा देश स्वामी जी के संदेशों के प्रकाश में अपनी समस्याओं का समाधान खोज सकता है और सारा विश्व उनके संदेशों के आधार पर शान्तिपूर्वक जीवन व्यतीत कर सकता है।

रामकृष्ण मिषन आश्रम के सेवाकार्यों की प्रषंसा करते हुए कहा कि सेवा की यह भावना ऐसे ही बनाये रखें, यह प्रदेष और देषवासियों के लिये लाभदायक होगा। मिषन की गतिविधियों का और अधिक विस्तार करें तथा ऐसे ही मिषन की कीर्ति बढ़ते रहेगी।

कार्यक्रम के आरंभ में आश्रम के सचिव स्वामी सत्यरूपानंद जी महाराज ने आश्रम के सेवा कार्यों का विवरण देते हुए बताया कि लगभग नौ लाख की राषि सेवा कार्यों में खर्च की गई है। आश्रम के अध्यक्ष एवं प्रबंधक पद्म डॉ. अरूण दाबके ने कहा कि जब भारत परतंत्रता में जकड़ा हुआ था और सर्वत्र निराषा और व्याप्त थी, ऐसे समय में देष के युवाओं को युगपुरूष स्वामी विवेकानंद ने सही मार्ग दिखाया। विज्ञान और आध्यात्म को मिलाकर मानव आवष्यकता से जोड़ दिया और उनके विचारों का अनुकरण करके ही भौतिक के साथ नैतिक प्रगति कर पायेंगे।

हिन्दुस्तान पेट्रोलियम के जनरल मैनेजर श्री एस.एन. दामले ने कहा कि स्वामी विवेकानंद महान दूरदर्षी और भारतीयों के लिए आदर्ष रहे हैं। उनके बताये गए विचारों का अनुसरण कर सेवा कार्यों से जुड़कर रामकृष्ण मिषन ने उल्लेखनीय कार्य किए है। इस अवसर पर हिन्दुस्तान पेट्रोलियम की ओर से सामाजिक कार्यों एवं गतिविधियों के लिए 'टाटा स्पेसियो' कार प्रदान की गई।

राज्यपाल के करकमलों से स्वामी विवेकानंद के विचारों पर आधारित प्रतियोगिताओं में विजेताओं को पुरस्कार वितरित किया गया। जिसमें अंतर्महाविद्यालयीन विवेकानंद भाषण प्रतियोगिता में 'वर्तमान भारत और स्वामी विवेकानंद' विषय पर एनआईटी रायपुर की छात्रा कुमारी खिलेष्वरी ध्रुव, अंतर्विद्यालयीन विवेकानंद भाषण प्रतियोगिता में 'भारतीय नवजागरण के उद्गाता स्वामी विवेकानंद' विषय पर सालेम इंग्लिष स्कूल, रायपुर की कुमारी पारूल ठाकुर, अंतर्माध्यमिक शाला विवेकानंद भाषण प्रतियोगिता 'राष्ट्रनिर्माता स्वामी विवेकानंद' विषय पर सुषांत झा, और अंत:प्राथमिक पाठ-आवृत्ति प्रतियोगिता में मानवेन्द्र ठाकुर प्रथम स्थान पर रहे। विजेता छात्रों ने अपने ओजमय भाषण की पुनरावृति भी की। इस मौके पर श्री नरसिम्हन ने कलेण्डर का विमोचन भी किया।

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