Swami Vivekanand

स्वामी विवेकानंद

युग प्रवर्तक
महान दार्शनिक
युवा ह्रदय सम्राट

युवा दिवस - स्वामी विवेकानंद जयंती

Brijmohan Agrawal in Vivekanand Memorial Lecture

CM in Vivekanand Memorial Lecture on Yourth Day Eve

Kanak Tiwari in Vivekanand Memorial Lecture on Yourth Day Eve

Rakesh Chaturvedi in Vivekanand Memorial Lecture on Yourth Day Eve

Satya SwaRupanand in Vivekanand Memorial Lecture on Yourth Day Eve

Shri Faranand in Vivekanand Memorial Lecture on Yourth Day Eve

Swagat in Vivekanand Jayanti on Yourth Day Eve

Vivekanand Gatha on Yourth Day Eve By Rakesh Tiwari

राजधानी में आज स्वामी विवेकानन्द स्मृति व्याख्यान

महान दार्शनिक स्वामी विवेकानन्द की जयंती की पूर्व संध्या पर राज्य शासन के संस्कृति विभाग द्वारा कल 11 जनवरी को यहां उनकी स्मृति में व्याख्यान का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम स्थानीय कलेक्टोरेट के नजदीक टॉउन हाल में शाम 5.30 बजे प्रारंभ होगा। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह कार्यक्रम के मुख्य अतिथि होंगे। पर्यटन और संस्कृति मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में लोकसभा सांसद श्री रमेश बैस और श्रीमती करूणा शुक्ला, पंचायत और ग्रामीण विकास तथा स्कूल शिक्षा मंत्री श्री अजय चन्द्राकर तथा नगर निगम रायपुर के महापौर श्री सुनील सोनी विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। स्वामी विवेकानन्द स्मृति व्याख्यान के इस कार्यक्रम में रामकृष्ण मिशन रायपुर के स्वामी सत्यस्वरूपानन्द जी महाराज और वरिष्ठ चिंतक और लेखक श्री कनक तिवारी प्रमुख वक्ता होंगे। संस्कृति विभाग ने सभी नागरिकों से कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की है।

विवेकानंद ने भारतीयों के आत्मगौरव को जागृत किया - श्री नरसिम्हन

स्वामी विवेकानंद की 146वीं जयंती के अवसर पर कल रायपुर में रामकृष्ण मिषन आश्रम द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रदेष के राज्यपाल श्री ई.एस.एल. नरसिम्हन ने कहा कि स्वामी विवेकानंद देश की महान आत्मा, महान संत और महामानव थे। युग पुरूष स्वामी विवेकानंद ने भारतवासियों में आत्मगौरव की भावना को जगाने, उसे प्रेरित करने, अपनी संस्कृति, इतिहास और आध्यात्मिक परम्पराओं के अनुरूप बनाने का कार्य किया।

श्री नरसिम्हन ने विवेकानंद महाविद्यालय चेन्नई की यादों को स्मरण करते हुए कहा कि मैं भी विविध गतिविधियों में भाग लिया करता था। मंच पर जो भी वक्ता स्वामी विवेकानंद के विचारों पर भाषण देता है स्वामी जी स्वयं उनके हृदय में प्रवेष कर जाते हैं और शब्द उनके ही होते हैं और स्वामी विवेकानंद पर बोलने वाले वक्ता के ऊर्जा का रहस्य यही है। कवि रविन्द्र नाथ टैगोर के कथन का उल्लेख करते हुए कहा कि 'यदि कोई भारत को समझना चाहता है तो उसे विवेकानंद से जुड़े साहित्य अवष्य पढ़ना चाहिए।

राज्यपाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि स्वामी विवेकानंद के कार्य और आदर्ष मानवता की धरोहर है। देष के पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू ने एक बार कहा था, ''यदि आप स्वामी विवेकानंद की रचनाओं तथा व्याख्यानों को पढ़े तो आप उनमें एक अदभुत बात पाएंगे कि वे कभी पुराने नहीं लगते। इसका कारण यह है कि उन्होंने जो कुछ भी लिखा या कहा वह हमारी या विश्व की समस्याओं के मूलभूत पहलुओं से संबंधित है। श्री नरसिम्हन ने कहा कि स्वामी जी ने अनुभव किया था कि देश की दुर्दशा का एक बहुत बड़ा कारण गरीबी है और इसीलिए देश की गरीबी को दूर करने के लिए उन्होंने निरन्तर प्रयास किया। उन्होंने कर्म पर बल दिया और कहा कि जब व्यक्ति का कर्म पूजा बन जाता है तो उसके लिए मंदिर और प्रयोग में कोई फर्क नहीं रह जाता। उन्होंने कहा 'उत्तिाष्ठ जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत' अर्थात् उठो, जागो, जब तक इच्छित वस्तु को प्राप्त नहीं कर लेते, तब तक बराबर उसकी ओर बढ़ते जाओ।' स्वामी विवेकानंद जी का यह आह्वान मंत्र हम सभी के लिए है।

श्री नरसिम्हन ने कहा कि स्वामी जी ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा है कि देष को वीरों की आवष्यकता है, अत: वीर बनो। पर्वत की भांति अडिग रहो। 'सत्यमेव जयते' -सत्य की ही सदैव विजय होती है। स्वामी विवेकानंद ने पूजा-पाठ से भी ज्यादा जोर सेवा पर दिया। वे केवल व्याख्यान देकर ही नहीं रूके। वे आदर्ष संगठनकर्ता भी थे। उन्होंने अपने गुरूदेव के कार्य को आगे चलाने के लिए एक स्थायी संस्था स्थापित करने का विचार किया और रामकृष्ण मठ एवं रामकृष्ण मिषन की स्थापना की। मिषन की जो बात सबसे ज्यादा प्रभावित करती है, वह है सेवा पर व्यापक जोर। सेवा कार्य के द्वारा ही हमारी आत्मोन्नति होगी। उन्होंने हमेषा दाता का आसन ग्रहण करने पर जोर दिया और कहा कि सर्वस्व दे दो पर बदले में कुछ न चाहो। आज के वातावरण में स्वामी विवेकानंद जी के विचारों को और अधिक समझने और प्रचार-प्रसार करने की जरूरत है। आज हमारा देश स्वामी जी के संदेशों के प्रकाश में अपनी समस्याओं का समाधान खोज सकता है और सारा विश्व उनके संदेशों के आधार पर शान्तिपूर्वक जीवन व्यतीत कर सकता है।

रामकृष्ण मिषन आश्रम के सेवाकार्यों की प्रषंसा करते हुए कहा कि सेवा की यह भावना ऐसे ही बनाये रखें, यह प्रदेष और देषवासियों के लिये लाभदायक होगा। मिषन की गतिविधियों का और अधिक विस्तार करें तथा ऐसे ही मिषन की कीर्ति बढ़ते रहेगी।

कार्यक्रम के आरंभ में आश्रम के सचिव स्वामी सत्यरूपानंद जी महाराज ने आश्रम के सेवा कार्यों का विवरण देते हुए बताया कि लगभग नौ लाख की राषि सेवा कार्यों में खर्च की गई है। आश्रम के अध्यक्ष एवं प्रबंधक पद्म डॉ. अरूण दाबके ने कहा कि जब भारत परतंत्रता में जकड़ा हुआ था और सर्वत्र निराषा और व्याप्त थी, ऐसे समय में देष के युवाओं को युगपुरूष स्वामी विवेकानंद ने सही मार्ग दिखाया। विज्ञान और आध्यात्म को मिलाकर मानव आवष्यकता से जोड़ दिया और उनके विचारों का अनुकरण करके ही भौतिक के साथ नैतिक प्रगति कर पायेंगे।

हिन्दुस्तान पेट्रोलियम के जनरल मैनेजर श्री एस.एन. दामले ने कहा कि स्वामी विवेकानंद महान दूरदर्षी और भारतीयों के लिए आदर्ष रहे हैं। उनके बताये गए विचारों का अनुसरण कर सेवा कार्यों से जुड़कर रामकृष्ण मिषन ने उल्लेखनीय कार्य किए है। इस अवसर पर हिन्दुस्तान पेट्रोलियम की ओर से सामाजिक कार्यों एवं गतिविधियों के लिए 'टाटा स्पेसियो' कार प्रदान की गई।

राज्यपाल के करकमलों से स्वामी विवेकानंद के विचारों पर आधारित प्रतियोगिताओं में विजेताओं को पुरस्कार वितरित किया गया। जिसमें अंतर्महाविद्यालयीन विवेकानंद भाषण प्रतियोगिता में 'वर्तमान भारत और स्वामी विवेकानंद' विषय पर एनआईटी रायपुर की छात्रा कुमारी खिलेष्वरी ध्रुव, अंतर्विद्यालयीन विवेकानंद भाषण प्रतियोगिता में 'भारतीय नवजागरण के उद्गाता स्वामी विवेकानंद' विषय पर सालेम इंग्लिष स्कूल, रायपुर की कुमारी पारूल ठाकुर, अंतर्माध्यमिक शाला विवेकानंद भाषण प्रतियोगिता 'राष्ट्रनिर्माता स्वामी विवेकानंद' विषय पर सुषांत झा, और अंत:प्राथमिक पाठ-आवृत्ति प्रतियोगिता में मानवेन्द्र ठाकुर प्रथम स्थान पर रहे। विजेता छात्रों ने अपने ओजमय भाषण की पुनरावृति भी की। इस मौके पर श्री नरसिम्हन ने कलेण्डर का विमोचन भी किया।

विवेकानन्द प्रबुध्द संस्थान शुरू करने हरसंभव सहयोग मिलेगा - डॉ. रमन सिंह

स्वामी विवेकानन्द जयंती की पूर्व संध्या पर व्याख्यान माला आयोजित
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा कि राज्य में 'स्वामी विवेकानन्द प्रबुध्द संस्थान' शुरू करने की परियोजना में राज्य सरकार भी पूरी गंभीरता के साथ अपना योगदान देगी। डॉ. सिंह आज शाम यहां संस्कृति विभाग द्वारा टाउन हॉल में स्वामी विवेकानन्द की जयंती की पूर्व संध्या पर आयोजित व्याख्यान माला को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस संस्थान का स्वरूप और संस्थान के माध्यम से यहां होने वाली गतिविधियों का स्पष्ट रूप से चिन्हांकन किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की यह मंशा है कि छत्तीसगढ़ में स्थापित होने वाला स्वामी विवेकानन्द को समर्पित यह संस्थान विश्व स्तर के संस्थान के रूप में विकसित हो। इसके लिए इस क्षेत्र के विद्वतजनों के साथ व्यापक विचार-विमर्श की जरूरत है। संस्थान का स्वरूप तय होने के बाद विधानसभा में भी चर्चा की जाएगी और इसे वैधानिक स्वरूप प्रदान किया जायेगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इस वर्ष संस्कृति विभाग के बजट में विवेकानन्द प्रबुध्द संस्थान के लिए भी प्रावधान रखा जाएगा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने की। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री श्री अजय चन्द्राकर, बेलूर मठ कोलकाता के स्वामी श्रीफरानंद, विवेकानन्द आश्रम रायपुर के स्वामी सत्यस्वरूपानंद, पद्मश्री सम्मान प्राप्त डॉ. महादेव पाण्डेय, रायपुर नगर निगम के महापौर श्री सुनील सोनी, वरिष्ठ लेखक श्री कनक तिवारी और संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव श्री टी.राधाकृष्णन भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने व्याख्यान माला में कहा कि यह हमारे लिए गौरव का विषय है कि विश्व को दिशा देने वाले देश के महान दार्शनिक स्वामी विवेकानन्द ने अपने बचपन का कुछ समय रायपुर में बिताया। यह हमारा दायित्व है कि हम छत्तीसगढ़ की राजधानी से जुड़ी उनकी स्मृति को चिरस्थायी बनाने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि हम सब मिलकर इस काम को आगे बढाएंगे राज्य सरकार भी तत्परता के साथ इसके लिए कार्य करेगी।

संस्कृति मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है कि स्वामी विवेकानन्द ने पूरी दुनिया में धर्म और संस्कृति की पताका फहरायी। स्वामी विवेकानंद का छत्तीसगढ़ की धरती से गहरा जुड़ाव रहा है। उन्होंने अपने जीवन के महत्वपूर्ण ढाई वर्ष रायपुर में बिताए हैं। श्री अग्रवाल ने कहा कि तेरह वर्ष की उम्र में जबलपुर से रायपुर आते समय उन्हें छत्तीसगढ़ की धरती में आध्यात्मिक अनुभूति हुई। आध्यात्मिक व सांस्कृतिक दूत के रूप में स्वामी विवेकानंद ने विश्व में भारत के गौरव को स्थापित करने का कार्य किया। ऐसी महान विभूति के माध्यम से छत्तीसगढ़ की पहचान बने, यही हमारा प्रयास होना चाहिए। इस उद्देश्य से ''विवेकानंद प्रबुध्द संस्थान'' स्थापित करने के लिए एक परियोजना तैयार की गई है।

स्वामी सत्यस्वरूपानंद जी ने व्याख्यान माला में कहा कि छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानन्द की आध्यात्मिक जन्मभूमि है। उन्होंने कहा कि हालांकि इतिहास में इस बात का उल्लेख नहीं है लेकिन स्वामी विवेकानन्द को बाल्यावस्था में जिस परिवेश में प्रथम भाव समाधि हुई थी और दिव्य ज्ञान प्राप्त हुआ था समय काल और परिस्थितियों के अनुसार वह स्थान छत्तीसगढ़ ही चिल्फी घाटी ही थी। उन्होंने स्वामी विवेकानन्द के जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मनुष्य में ईश्वर के दर्शन करना और मनुष्य की सेवा करना ही स्वामी विवेकानन्द के संदेशों का सार है। बेलूर मठ के स्वामी श्रीफरानंद ने भी स्वामी रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानन्द ने जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा रायपुर में स्वामी विवेकानन्द की स्मृति में एक ऐसे संस्थान की स्थापना होनी चाहिए जहां मनुष्य के भीतर विश्वास जागे और वह अपने में चैतन्य सत्ता का अनुभव कर सके। वरिष्ठ अधिवक्ता श्री कनक तिवारी ने कहा कि स्वामी विवेकानन्द पहले व्यक्ति थे जिन्होंने हिन्दुस्तान को सबसे ज्यादा समझा। उन्होंने कहा कि देश में बौध्दिक क्रांति और नवजागरण के काल में छत्तीसगढ़ की विभूतियों ने अग्रणी भूमिका निभायी थी। छत्तीसगढ़ में इतनी प्रतिभा और क्षमता है कि वह आज भी देश का सिरमौर राज्य बन सकता है।

इसके पूर्व आज दोपहर को यहां रेडक्रास भवन के सभा गृह में संस्कृति मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल की उपस्थिति में ''विवेकानंद प्रबुध्द संस्थान'' के स्वरूप और संरचना का प्रारूप तैयार करने साहित्यकारों, वरिष्ठ पत्रकारों व बुध्दिजीवियों की विचार गोष्ठी आयोजित की गई। इसमें बेलूर मठ कलकत्ता के स्वामी श्रीफरानंद और रामकृष्ण मिशन विवेकानंद आश्रम रायपुर के स्वामी सत्यस्वरूपानंद, कोलकाता हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश श्री सूर्यकुमार तिवारी, साहित्यकार डॉ. राजेद्र मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार श्री बसंत तिवारी, श्री गोविंद लाल वोरा, श्री सुनील कुमार, छत्तीसगढ़ राज्य हिन्दी ग्रंथ अकादमी के संचालक श्री रमेश नैयर, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी डॉ. महादेव पाण्डेय, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सच्चिदानंद जोशी, वरिष्ठ लेखक श्री कनक तिवारी, पूर्व विधायक श्री लक्ष्मी नारायण इंदुरिया, शिक्षाविद् श्री ओम प्रकाश वर्मा, श्रीमती पुष्पा तिवारी,, सुश्री जया जादवानी, और श्री बालचंद कछवाहा ने अपने विचार व्यक्त किए। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के सचिव श्री के. सुब्रमणियम, संचालक संस्कृति एवं पुरातत्व श्री राकेश चतुर्वेदी सहित संस्कृति विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

व्याख्यान माला में प्रबुध्द जन बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

संस्कृति मंत्री श्री अग्रवाल ने स्वामी विवेकानंद को विनम्र श्रध्दांजलि दी

पर्यटन मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने आज महान दार्शनिक स्वामी विवेकानंद की जयंती पर बूढ़ातालाब के नीलाभ उद्यान में उनकी प्रतिमा पर श्रध्दासुमन अर्पित कर विनम्र श्रध्दांजलि दी।

नगर निगम रायपुर के महापौर श्री सुनील सोनी, सभापति श्री रतन डागा, नेता प्रतिपक्ष श्री कुलदीप जुनेजा, रायपुर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष श्री वर्धमान खुराना, पार्षद श्री सूर्यकांत राठौर, श्री नरेन्द्र यादव, श्री छगन चौबे, श्री दिलीप सारथी, श्री संजू नारायण सिंह ठाकुर, श्री रविकांत यादव सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी स्वामी विवेकानंद को श्रध्दांजलि दी।