रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में 14वां दीक्षांत समारोह

पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के चतुर्दश दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री ई.एस.एल. नरसिम्हन ने कहा कि हमारी शिक्षा व्यवस्था विश्व की सबसे बड़ी शिक्षा व्यवस्था है। हमारे शोध कार्य विश्व को आकर्षित करने में और अधिक सफल हो, इसके लिए जरूरी है कि विश्वविद्यालय युवाओं को विज्ञान के प्रति अधिक आकर्षित करें तथा मूल शोध कार्यों के माध्यम से पूरी मानवता को लाभान्वित करें। दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में आणविक ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष एवं अणु ऊर्जा के क्षेत्र में अंतरर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वैज्ञानिक डॉ. अनिल काकोड़कर उपस्थित थे। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह उपस्थित थे।

समारोह में उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. कृष्‍णमूर्ति बांधी, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री ब्रजमोहन अग्रवाल, स्कूल शिक्षा मंत्री श्री अजय चंद्राकर, लोक निर्माण मंत्री श्री राजेश मूणत तथा महापौर श्री सुनील सोनी भी विशेष रूप से उपस्थित थे। दीक्षांत समारोह में आणविक वैज्ञानिक डॉ. अनिल काकोडकर को डॉक्टर आफ सांइस (डी.एस.सी.) की मानद उपाधि से विभूषित किया गया। संस्कृत के क्षेत्र में डॉ. महेश चंद्र शर्मा को डॉक्टर आफ लेटर (डी.लिट) की उपाधि से सम्मानित किया गया। दीक्षांत समारोह में पी.एच.डी. करने वाले विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान की गई तथा वर्ष 2007 में विभिन्न परीक्षाओं में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों एवं विषय विशेष में सर्वाधिक अंक अर्जित करने वाले विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया।

दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए श्री नरसिम्हन ने कहा कि पिछली शताब्दी महान भारतीय वैज्ञानिकों के मार्गदर्शक, वैज्ञानिक शोधों के महत्ता की गवाह रही है। उनके योगदान मील का पत्थर हैं। हमें इस बात का गौरव है कि आज हमारे बीच इस दीक्षांत समारोह में अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त डॉ. अनिल काकोडकर उपस्थित है। उनके कार्य भारत के लिए एक इतिहास का निर्माण करने जा रहे है और आने वाले समय में लोग उनके योगदान को शिद्दत से महसूस करेंगे। श्री नरसिम्हन ने कहा कि आज इस बात कि जरूरत है कि विज्ञान और तकनीक का हमारे देष के दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले करोड़ों भारतीयों के जीवन को गुणवत्तापूर्ण बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका को और भी बेहतर तरीके से बढ़ाये। छत्तीसगढ़ ''रॉ-मटेरियल का स्टोर हाउस'' है। यह समय की मांग है कि इस रॉ-मटेरियल को वैज्ञानिक मानव संसाधनों तथा पूंजी के माध्यम से अधिकाधिक बढ़ाया जाये जिससे यहां की समृध्दि बढ़े।

श्री नरसिम्हन ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े प्रबुध्दजनों, शिक्षकों और विद्यार्थियों की यह जिम्मेदारी है कि शैक्षणिक गुणवत्ता को हर हाल में बनाये रखा जाये तथा किसी भी हालत में शिक्षा का स्तर न गिरने पाए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि शैक्षणिक गुणवत्ता बनाये रखने के लिए किसी भी प्रकार कोई भी समझौता नहीं किया जाय। उन्होंने शिक्षकों तथा छात्रों के बीच तथा छात्रों के बीच आपसी दूरी को कम करने के लिए परस्पर समन्वय बढ़ाने पर भी जोर दिया।

आणविक ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष श्री अनिल काकोड़कर ने कहा कि हम सभी भारतीय मेधा से परिचित है। भारत ने वैष्विक ज्ञान के निर्माण में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है और यह प्रक्रिया अभी भी निरंतर जारी है। भारतीय बुध्दिमता अपनी क्षमताओं के कारण विदेशियों की निर्भरता का कारण बनते जा रही है और हमारे देष के युवाओं की बुध्दिमता का निरंतर पलायन हो रहा है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को याद रहे कि वे भारत केन्द्रित है न कि पाष्चात्य केन्द्रित । उन्होंने कहा कि उच्च स्तरीय शोध गतिवधियों और तकनीकी क्षेत्रों के बीच समन्वय बढ़ाया जाना चाहिये, अन्यथा भारी कीमतों पर भारतीय बुध्दिमता का विदेशों में पलायन की पक्रिया निरंतर जारी रहेगा। उन्होंने स्वदेशी तकनीक पर जोर देते हुए कहा कि अगर हम विदेशी तकनीकों पर निर्भर रहेंगे तो विष्व के नेता नहीं बन सकेंगे। यह हमारी शिक्षा व्यवस्था के लिये चुनौती है जो ऐसे समर्थ युवाओं का निर्माण करे जो वैष्विक प्रतिस्पर्धा का सामना कर सके और देष को ऊंचाई पर ले जा सके। उन्होंने कहा कि पृथ्वी और पर्यावरण के मद्देनजर मानवीय जरूरतों के लिए परमाणु ऊर्जा का सदुपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने देष में वैज्ञानिक अनुसंधानों को बढ़ावा देने के प्रयासों की जानकारी भी दी और कहा कि इस क्षेत्र में आज के युवाओं के समक्ष पहले से बेहतर अवसर उपलब्ध है।

विशिष्ट अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा कि डॉ. अनिल काकोडकर की उपस्थिति से विश्वविद्यालय कैम्पस में अभूतपूर्व ऊर्जा का अहसास हो रहा है। डॉ. काकोडकर ने थोरियम के माध्यम दुनिया को ऊर्जा की उपलब्धता का रास्ता दिखाया है जिससे देश की सौ सालों तक की ऊर्जा की चुनौतियों का समाधान संभव है। उन्होंने कहा कि केरल के बाद छत्तीसगढ़ ऐसा दूसरा राज्य है जहां अनुपातिक रूप से महिलाओं की संख्या अधिक है। यह भी खुशी की बात है कि आज पदक प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं में 80 प्रतिशत बालिकाएं है।

उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी ने कहा कि राज्य में शिक्षा के गुणवत्ता बढ़ाने तथा विश्वविद्यालय को उत्कृश्ट विश्वविद्यालय बनाने के लिए हम संकल्पित है। बस्तर कैम्पस को भी सर्वसुविधायुक्त बनाया जा रहा है। हमारे राज्य में अकाडेमिक स्टाफ कॉलेज की स्थापना यू.जी.सी. अनुदान से हो चुकी है तथा आई. आई. एम., आई.आई.टी. तथा केन्द्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना निकट भविष्य में होने जा रही है।

इसके पहले विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. लक्ष्मण चतुर्वेदी ने चतुर्दश दीक्षांत समारोह में गोल्ड मेडल पाने वाले छात्र-छात्राओं तथा पी.एच.डी. की उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दी। उन्होंने विद्यार्थियों को सत्य बोलने, कर्तव्यों का पालन करने तथा स्वाध्याय करने के साथ-साथ अपने आचार और व्यवहार के द्वारा उपाधि की गरिमा की रक्षा करने का उपदेश भी दिया। समारोह में बड़ी संख्या में कार्य परिषद के आर्चायगण तथा विद्यार्थीगण उपस्थित थे।

Dr Anil Kakodkar at RSU Convocation

Dr Raman Singh at RSU Convocation

Shri ESL Narsimhan in RSU Convocation