रोटी, कपड़ा और मकान के नारे को हकीकत में बदलने की सफल कोशिश
शोषण कुचक्र से मुक्त हुए मेहनतकश किसान
भूख और कुपोषण से मुक्ति के लिए मुकम्मल इंतजाम
स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा 'सलवा जुडूम' का योगदान
अनुसूचित जाति-जनजाति समेत सामान्य वर्ग की गरीब बालिकाओं को भी मिलेगी सायकल
बिजली कटौती से मुक्त पहला राज्य बना छत्तीसगढ़
मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ी और हिन्दी में दिया अपना संदेश 
रायपुर 26 जनवरी 2008
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने अपने संदेश की शुरूआत राजभाषा छत्तीसगढ़ी में करते हुए 'जय-जोहार' के साथ आम जनता का अभिनंदन किया। डॉ. सिंह ने कहा कि आज जम्मो भारतवासी मनके राष्ट्रीय तिहार हे। हमर देस ल कइसे आजादी मिलिस, आजादी पाए बर कतका मनखे मन हांसत-हांसत अपन प्राण दे दिन ए बात ह इतिहास म लिखाय हे। तभो ले जब-जब देश के आन-बान-शान के गोठ आथे, तब-तब हमर माथा ऊंचा हो जाथे, के कइसे-कइसे वीरता के काम हमर पुरखा मन करे रहिन हें। आज के दिन जम्मो शहीद ल परनाम करे के दिन आय। आज के दिन जम्मो मनखे ल घलोक परनाम करे के दिन आय, जिंकर त्याग-तपस्या, अऊ मेहनत, लगन ले हमर देश के नांव आज दुनिया म चमकत हे। मैं अपन डाहर ले अऊ छत्तीसगढ़ के जम्मो दू करोड़ जनता डाहर ले जम्मो पुरखा मन ला परनाम करत हौं। मोला ए बात के गरब हे, के आज के दिन के नांव छत्तीसगढ़ के इतिहास म स्वर्णाच्छर म लिखाही, काबर के जन-जन के भाखा छत्तीसगढ़ी ला राज-काज के भाखा बनाए के बाद ए पहला गणतंत्र दिवस हे।
उन्होंने कहा कि कहे जाथे के इतिहास ह अपन आप ला दुहराथे। जेन संदेश बाबा गुरू घासीदास जी ह ढाई सौ बछर पहिली दिए हें, ओकर जरूरत आज जम्मो दुनिया महसूस करत हे। एक तो अपन महतारी भाखा के मान अऊ दूसर सत, अहिंसा अऊ इंसानी एकता के संदेश ह आज जम्मो दुनिया म सिर चढ़के बोलत हे। जेन भाखा म बाबा घासीदास जी के संदेश मिलथे, वो गुरतुर भाखा, हमर गांव-गांव में बोले जाथे, तौने भाखा जन-जन के 'छत्तीसगढ़ी भाखा' ल 'राजभाषा' बनाए के मौका हमन ल गुरू घासीदास बाबा के आषीर्वाद ले मिलिस हे। ए काम करके जोन संतोष मिले हे ओकर बखान नई करे जा सकय। हमन चाहथन के 'मनखे-मनखे एक समान' के गोठ ल मान के ऊंच-नीच, गोरा-काला, अमीर-गरीब जइसन भेदभाव हा खतम हो जाय। ते पाय के कुतुबमीनार ले ऊंचा जैतखम्भा के निर्माण कार्य शुरू हो गे हे।
डॉ. रमन सिंह ने कहा है कि राज्य के विकास के लिए कई आयामों पर जिस तेजी से कार्य किए जा रहे हैं, उससे विकास क्रांति का हम सबका सपना भी साकार हो रहा है। समाज की आखरी पंक्ति के सबसे अंतिम व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान लाने और उसके जीवन को आसान बनाने की हरसंभव कोशिश राज्य सरकार द्वारा की जा रही है। उन्होंने कहा कि रोटी, कपड़ा और मकान के वर्षों से सुनते आ रहे नारे को हकीकत में बदलने की सफल कोशिश राज्य सरकार द्वारा की गयी है। राज्य में खाद्यान्न सुरक्षा की एक ऐसी अभूतपूर्व व्यवस्था कर दी है कि किसी भी व्यक्ति को भूखे पेट सोने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा। राज्य में भूख और कुपोषण से मुक्ति के लिए प्रदेश सरकार द्वारा मुकम्मल इंतजाम किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि हर जरूरतमंद गरीब परिवार को तीन रूपए किलो में हर महीने 35 किलो चावल देने की एक अनोखी योजना हमारी सरकार ने शुरू की है। मुख्यमंत्री आज गणतंत्र दिवस के अवसर सरगुजा जिले के मुख्यालय अम्बिकापुर में देशभक्ति से परिपूर्ण माहौल में आयोजित समारोह में प्रदेश वासियों के नाम अपने उद्बोधन में इस आशय के विचार व्यक्त किए। डॉ. सिंह ने अपने उद्बोधन में राज्य सरकार की विभिन्न उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सामाजिक-आर्थिक विकास के रचनात्मक प्रयासों से सरगुजा अंचल में नक्सल हिंसा पर प्रभावी अंकुश लगा है जो, हिंसक तत्वों के खिलाफ गणतंत्र की जीत का एक शिखर है। डॉ. सिंह ने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि दक्षिण बस्तर में नक्सली हिंसा के खिलाफ वनवासी ग्रामीणों द्वारा संचालित शांति अभियान 'सलवा जुडूम' सफल होगा और छत्तीसगढ़ नक्सल आतंक से मुक्त होगा। देश की एकता, अखण्डता और लोकतंत्र की रक्षा के लिए सलवा जुडूम का योगदान स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा।

डॉ. रमन सिंह ने समारोह में ध्वजारोहण किया, गणतंत्र दिवस परेड की सलामी ली और जनता को संबोधित करते हुए अपना संदेश दिया। संयुक्त परेड में पुलिस, होमगार्ड, छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल, एन.सी.सी. और भारत स्काउट एवं गाईडस संगठन के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर स्थानीय छात्र-छात्राओं द्वारा राष्ट्रीय एकता और देशप्रेम की भावनाओं पर आधारित रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए गए। विभिन्न विभागों द्वारा शासकीय योजनाओं और जिले की विकास गतिविधियों पर आधारित आकर्षक झांकियां भी प्रदर्शित की गयी।

मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में आगे कहा कि आज मैं बड़ी प्रसन्नता और गौरव के साथ कहना चाहता हूं कि हमने छत्तीसगढ़ में ऐसी अभूतपूर्व व्यवस्था कर दी है कि किसी भी व्यक्ति को भूखे पेट सोने को मजबूर न होना पड़े। कोई भी बच्चा कुपोषण का शिकार नहीं हो पाए। इसके लिए हमारी सरकार ने राज्य में हर जरूरतमंद व्यक्ति को 3 रूपये किलो में चावल देने की अनूठी योजना शुरू कर दी है। रोटी, कपड़ा और मकान का नारा तो जनता बरसों से सुनती आ रही है लेकिन उस नारे को हकीकत में बदलने का सफल प्रयास हमारी सरकार ने किया है। मुख्यमंत्री खाद्यान्न सहायता योजना के अंतर्गत एक ओर जहां प्रदेश के 34 लाख जरूरतमंद परिवारों को 35 किलो चावल प्रतिमाह तीन रूपए की रियायती दर पर उपलब्ध होगा, वहीं भूमिहीनों के लिए नि:शुल्क आवासीय भूखण्ड देने की योजना भी प्रारंभ की गयी है। सिर छिपाने के लिए एक छत का सपना हर इंसान रखता है, लेकिन उनका सपना साकार होने का वक्त अब आया है। तकरीबन एक लाख आवासहीनों को भूखण्ड दिए जा रहे हैं। साथ ही अटल आवास, दीनदयाल आवास जैसी योजनाओं के माध्यम से सस्ती दरों पर मकान उपलब्ध कराने का काम भी युध्द स्तर पर जारी है।
डॉ. सिंह ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को याद करते हुए आगे कहा कि महात्मा गांधी ने कहा था कि भारत देश की आत्मा गांवों में बसती है। छत्तीसगढ़ की आत्मा भी गांवों में बसती है और राज्य तथा हमारे गांवों की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार खेती-किसानी है। खेती करने वाले किसान भाई मेहनती तो होते हैं। लेकिन सूदखोरों के चंगुल में रहने के कारण उनकी माली हालत अच्छी नहीं रह पाती थी। मंहगे ब्याज पर कर्ज लेने के कारण वे उतने समृध्द नहीं हो पाते थे, जिसके वे हकदार थे। किसानों को इस स्थिति से उबारने का काम हमने किया। मुझे यह कहते हुए अत्यंत प्रसन्नता हो रही है कि अपना छत्तीसगढ़ देश का पहला ऐसा राज्य है जहां किसानों को छ: प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। कृषि ऋण को हमने आम किसानों का सहारा बनाया और उन्हें सूदखोरों के कर्ज के कुचक्र से बाहर निकाला। इसी का नतीजा है कि पहले जहां बमुष्किल 300 करोड़ रूपए की राषि किसानों को ऋण के रूप में वितरित हो पाती थी, वह राषि अब 600 करोड़ से ऊपर पहुंच गयी है। किसानों की जरूरतों को समझते हुए सरकार ने और भी कई क्रांतिकारी कदम उठाए हैं। प्रदेश के बहुत बड़े हिस्से में पानी के अभाव के चलते धान की केवल एक ही फसल ली जाती थी। लेकिन हमने गर्मियों में बांध से पानी छोड़ने का फैसला लेकर दूसरी फसल लेने का अवसर भी किसानों को दिया। जिसके कारण किसान भाई 400 करोड़ रूपए से भी अधिक मूल्य का अतिरिक्त धान उत्पादन कर रहे हैं।
डॉ. रमन सिंह ने कहा कि हमारा मानना है कि धान का सही दाम दिला कर ही छत्तीसगढ़ के किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारी जा सकती है। इसलिए धान का सही मूल्य दिलाना और सही तरीके से खरीदी का इंतजाम करना राज्य सरकार की पहली प्राथमिकता रही है। किसानों के धान का एक-एक दाना खरीदने के निर्देश हमारी सरकार द्वारा दिए गए। प्रसन्नता का विषय है कि इसका लाभ उठाते हुए किसान भाई हर साल 36-37 लाख मीटरिक टन धान समर्थन मूल्य पर बेच रहे हैं। सिंचाई की बेहतर व्यवस्था के लिए जिस तरह के क्रांतिकारी कदम राज्य सरकार द्वारा उठाए गए हैं इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि आजादी के बाद के 56 वर्षों में जितने पंप कनेक्षन दिए गए थे, उससे ज्यादा तो हम बीते तीन वर्षों में दे चुके हैं। इन तीन वर्षों में 75 हजार से भी अधिक पंप कनेक्षन किसानों को दिए गए हैं। किसानों की तकलीफें दूर करने के लिए यह निर्णय लिया गया कि जिन किसानों पर लंबे समय से सिंचाई कर बकाया है यदि वे उसकी 50 प्रतिशत राशि अदा करते हैं तो बाकी बची 50 प्रतिशत की राषि माफ कर दी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि और उद्योग विकास के रथ के दो पहिए माने जाते हैं। इसलिए हमने कृषि में विकास के क्रांतिकारी कदम उठाए तो औद्योगिक क्षेत्र में भी अनेक कीर्तिमान स्थापित किए हैं। काम के बेहतर वातावरण के कारण ही छत्तीसगढ़, पूरे देश में सर्वाधिक पूंजी निवेश के प्रस्ताव प्राप्त करने में सफल हुआ है। ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में तो पूरा देश छत्तीसगढ़ को आशा भरी नजरों से देख रहा है। जहां तमाम विकसित राज्य बिजली की कमी और वहां के निवासी बिजली कटौती के संकट से जूझ रहे हैं, वहीं हमने एक जनवरी, 2008 से पूरे राज्य को बिजली कटौती से मुक्त कर दिया है। मुझे यह कहते हुए गर्व और खुशी है कि बिजली कटौती मुक्त राज्य बनने का सम्मान प्राप्त करने वाला देश का पहला राज्य छत्तीसगढ़ है। 30 हजार मेगावाट से अधिक के बिजली उत्पादन की दिशा में निजी, सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों ने अपने-अपने स्तर पर कार्य प्रारंभ कर दिए हैं। हमें पूरा भरोसा है कि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ कष्मीर से कन्याकुमारी तक अपनी ऊर्जा के माध्यम से सारे देश को रौशन करेगा। साथ ही साथ इस्पात, अल्यूमीनियम और सीमेंट के क्षेत्र में भी कई परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इन तमाम औद्योगिक गतिविधियों से लाखों लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
डॉ. रमन सिंह ने कहा कि मैं ग्राम सुराज अभियान के दौरान जब बस्तर के एक गांव में पहुंचा था तो एक बहन ने मुझसे कहा कि तेन्दूपत्ता संग्राहकों के लिए जो चरण पादुका दी जाती है, वह इस काम में लगी महिलाओं को भी मिलनी चाहिए। मैं उस बहन को धन्यवाद देना चाहता हूं कि उसने जागरूकता से, हिम्मत से अपनी बात कही और अब हमने यह फैसला कर लिया है कि महिलाओं को चरण पादुका प्राथमिकता से दी जाए। हम अनुसूचित जाति, जनजाति की हाईस्कूल जाने वाली बेटियों को नि:शुल्क सायकलें देते हैं, इस वर्ग से अलग सामान्य वर्ग की गरीब बेटी ने मुझसे कहा कि हमें भी ऐसी सायकलें चाहिए तो हमारी सरकार ने अब हर गरीब परिवार की हाईस्कूल जाने वाली बेटी के लिए यह योजना लागू कर दी है। 38 लाख से अधिक बच्चों को गर्म मध्यान्ह भोजन दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि दस हजार बुनकरों का 11 करोड़ रूपए से अधिक का कर्ज माफ कर दिया गया। 51 वर्षों से छोटे-छोटे वन अपराधों के आरोपों का बोझ दिल पर ढोए तनाव में जीवन बिता रहे करीब सवा दो लाख गरीब लोगों के प्रकरण समाप्त कर दिए गए। आठ लाख अनुसूचित जाति, जनजाति परिवारों को एकलबत्ती के माध्यम से नि:शुल्क विद्युत प्रदाय किया जा रहा है। सभी किसानों और गांव वालों को नक्षा, खसरा और खतौनी की कम्प्यूटरीकृत प्रतियां नि:शुल्क देने का इंतजाम कर दिया गया है। जब हम ऐसे फैसले लेते जा रहे थे, तब समाज का एक तबका इन प्रयासों को बेमानी कहता फिर रहा था। लेकिन हमने यह देखा कि गरीबी और तकलीफों से घिरे हुए लोगों को राहत देने का काम अगर कोई लोकतांत्रिक सरकार भी नहीं करेगी तो और कौन करेगा। एक-एक फैसले से हजारों, लाखों चेहरों पर जो राहत की मुस्कराहट उभरती है, उसकी तुलना किसी भी चीज से करना सम्भव नहीं है। इस तरह लाखों लोगों को कहीं आर्थिक, तो कहीं सामाजिक तौर पर राहत देकर हमारी सरकार ने जो अनुभव हासिल किया है, उससे हमें और भी बडे-बडे क़ाम करने की शक्ति मिली। मुझे लगता है कि यही शक्ति लोकतंत्र को, गणतंत्र को सार्थक बनाने के लिए रचनात्मक ऊर्जा उत्पन्न करती है। इसलिए हम ऐसी आलोचनाओं से विचलित न हों जो गरीबों, आदिवासियों, अनुसूचित जातियों, वनवासियों और कमजोर तबकों का हित करने के रास्ते में अड़चन डालने के लिए की जाती हैं।
उन्होंने कहा कि यह हमारी नैतिक जिम्मेदारी है कि किसी बच्चे को भूख, किताबों या गणवेश जैसी चीजों के कारण पढ़ाई छोड़ने की मजबूरी न झेलनी पडे। इस वजह से हमने 48 लाख से ज्यादा बच्चों को नि:शुल्क किताबें दी। 6 लाख से अधिक बच्चों को नि:शुल्क गणवेश दिया। पौने दो लाख से ज्यादा बालिकाओं को नि:शुल्क कम्प्यूटर शिक्षा दे रहे हैं। हमारा मानना है कि इन कामों से बच्चों में अच्छी शिक्षा हासिल करने की ललक बढ़ी है और उनके पालकों के सिर से चिंता का बोझ हटा है। जो पीढ़ी अच्छी पढ़ाई से वंचित रह जाती, वह पीढ़ी अब इन सब योजनाओं से लाभान्वित हो रही है। आज मुझे यह कहते हुए संतोष हो रहा है कि हमने उस जरूरतमंद जनता के लिए काम किया, जिन्हें ऐसी सुविधाएं देने के बारे में बरसों से कोई सोच भी नहीं रहा था।

डॉ. रमन सिंह ने आगे कहा कि व्यक्तिगत रूप से गरीब जनता को सक्षम बनाने की जितनी जरूरत थी, उतनी ही जरूरत पूरी की पूरी प्रशासनिक संरचना को संवेदनषील बनाने की भी थी। इस बात को हमने पूरी गंभीरता से समझा। बस्तर जैसे विशाल आदिवासी अंचल में दो नए जिले बनाना, चार नए कमिष्नर कार्यालय प्रारम्भ करना, 1820 नए पटवारी हल्के गठित करना, 49 विकासखंडों को तहसील बनाना जैसे फैसलों का उद्देष्य आम जनता और प्रशासन के बीच की दूरियों को कम करना है। इसके साथ सूचना प्रौद्योगिकी के 'ऑन लाइन' विकल्पों तथा ग्राम सुराज जैसे गांव-गांव पहुंचने के उपायों की भी भरपूर मदद ली जा रही है। साढे चौदह हजार नए आंगनवाड़ी केन्द्रों की मंजूरी से महिलाओं और बच्चों को कुपोषण से बचाने का एक बड़ा तंत्र बन गया है, जिसमें 35 हजार आंगनवाड़ी केन्द्र शामिल होंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार के स्तर पर भी रोजगार के अवसरों में बढ़ोत्तरी के अनेक सार्थक कदम उठाए गए हैं। इन प्रयासों के कारण शिक्षाकर्मियों के 51 हजार पदों तथा पुलिस कर्मियों के 17 हजार पदों का सृजन किया गया। विभिन्न विभागों में भर्तियों पर लगा प्रतिबंध समाप्त किया गया, जिसके परिणाम स्वरूप हजारों युवाओं को रोजगार मिल रहा है। करीब 14 हजार दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमितिकरण का लाभ दिया गया है। 17 जिलों में ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना संचालित की जा रही है और 1 अप्रैल 2008 से दुर्ग जिले को भी इस योजना का लाभ मिलने लगेगा। इसके तहत करीब 15 लाख परिवारों को रोजगार दिया गया है।
डॉ. रमन सिंह ने अपने संदेश में आगे कहा कि नवा अंजोर परियोजना एक लाख परिवारों को लाभान्वित करने के लक्ष्य की ओर बढ़ रही है और अभी तक 77 हजार पांच सौ परिवारों को लाभ पहुंचाया जा चुका है। नगरीय निकायों में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए हाट बाजार योजना शुरू की गई है। जिसके तहत नगरीय निकायों को निर्माण कार्य हेतु बडे पैमाने पर आर्थिक सहायता दी जा रही है। 15 हजार से अधिक गुमटियों, दुकानों, चबूतरों आदि का निर्माण किया जा रहा है। युवाओं को रोजगारपरक प्रषिक्षण देने के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। बुनियादी अधोसंरचनाओं के विकास के साथ-साथ रोजगार के अवसरों में वृध्दि भी हो रही है। बिजली, पानी, सड़क, चिकित्सा, शिक्षा, कृषि, वनोपज आदि कोई भी ऐसा क्षेत्र नहीं है, जिसमें नए ढंग से, नए लक्ष्यों के साथ प्रगति दर्ज नहीं की गई हो। डॉ. सिंह ने कहा कि गांवों में स्वच्छता का वातावरण निर्मित करने में सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान मददगार साबित हो रहा है। बीपीएल परिवारों हेतु चार लाख तथा एपीएल परिवारों हेतु तीन लाख शौचालय बनाए जा चुके हैं। सभी शालाओं में बालक एवं बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय बनाने का अभियान चलाया जा रहा है। 16 हजार स्कूलों एवं चार हजार 153 आंगनवाड़ी केन्द्रों में शौचालयों का निर्माण पूर्ण हो चुका है। यह गर्व का विषय है कि प्रदेश में निर्मल ग्रामों की संख्या शीघ्र ही बढ़कर 11 सौ हो जाएगी। पांच विकासखंड भी निर्मल विकासखंड का दर्जा पा जाएंगे। पिछले एक साल में हमारे प्रयासों और जनभागीदारी से प्रदेश का सैनिटेशन कवरेज 8 प्रतिशत से बढ़कर 24 प्रतिशत हो गया है।
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ में विकास के कई आयामों पर जिस तेजी से कार्य किए जा रहे हैं, उससे विकास-क्रांति का हमारा सपना पूरा हो रहा है। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही मैं एक और अद्भुत क्रांति का जिक्र करना चाहूंगा जो राज्य के आदिवासी बहुल वनांचलों में करवट ले रही है। सामाजिक, आर्थिक विकास के रचनात्मक प्रयासों से सरगुजा अंचल में नक्सली गतिविधियों पर लगा अंकुश हिंसक तत्वों के खिलाफ गण-तंत्र की जीत का एक षिखर है। वहीं दूसरी ओर दक्षिण बस्तर के बियाबान में नक्सली हिंसा के तांडव के खिलाफ वनवासी ग्रामीणों का शांति अभियान 'सलवा जुडूम' भी देश और दुनिया के सामने एक मिसाल बन गया है। देश की एकता, अखण्डता और लोकतंत्र की रक्षा के लिए 'सलवा जुडूम' का योगदान स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा। मेरी कामना है कि 'सलवा जुडूम' सफल हो और छत्तीसगढ़ नक्सल आतंक से मुक्त राज्य बने। 'सलवा जुडूम' के दौरान शहीद हुए वीरों को मेरी और पूरे राज्य की ओर से श्रध्दासुमन अर्पित हैं। हमें दृढ़ विश्वास है कि उनकी शहादत खाली नहीं जाएगी।
डॉ. रमन सिंह ने कहा कि हमारी सरकार ने राज्य की बागडोर सम्हालते ही खाद्यान्न सुरक्षा का दायरा बढ़ाना शुरू कर दिया था। 'अन्नपूर्णा दाल-भात केंद्र' और 25 पैसे किलो 'छत्तीसगढ़ अमृत नमक' से जो शुरूआत की गई थी, वह अब हर गरीब व्यक्ति को तीन रूपए किलो पर चावल देने जैसी विशाल कल्याणकारी योजना तक पहुंच चुकी है। समाज की सबसे आखिरी पंक्ति के सबसे अंतिम व्यक्ति तक का जीवन आसान बनाने, उनके चेहरे पर मुस्कान लाने का अवसर हमें राज्य की उदारमना जनता के आषीर्वाद से ही मिला है। हम इस अवसर को राज्य के सौभाग्य में बदलने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। मुझे विश्वास है कि आपके सहयोग और समर्थन से हम आपके हर सपने सच कर सकेंगे।
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