हिमाचल प्रदेश सरकार वानरों को प्राकृतिक बसेरा उपलब्ध करवाने के लिए वानर संरक्षण पार्क विकसित करेगी, ताकि उन्हें प्राकृतिक आहार एवं आश्रय मिल सके और किसानों की फसलों को हो रहे नुकसान से बचाया जा सके। यह जानकारी मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने आज यहां शिमला के समीप तारादेवी में प्रदेश के पहले वानर संरक्षण पार्क के उद्धाटन अवसर पर दी, जिसका संचालन राज्य वन विभाग की वन्य प्राणी इकाई द्वारा किया जाएगा।
प्रो. धूमल ने कहा कि प्रदेश में बन्दरों की बढ़ती संख्या से किसानों की फसलों को व्यापक नुकसान पहुंच रहा है, इसलिए प्रदेश सरकार का प्रयास है कि वानरों के उचित शरणस्थली विकसित की जाए, जहां उन्हें समुचित मात्रा में प्राकृतिक सामग्री उपलब्ध हो सके। उन्होंने कहा कि कई बार बन्दरों के उत्पात के कारण किसानों को पारम्परिक फसलों को उगाना मुश्किल हो जाता है, जिससे उनकी आर्थिकी प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के वन्य प्राणी विशेषज्ञों के परामर्श के बाद राज्य में प्रयोग के तौर पर शिमला तथा हमीरपुर जिलों में दो वानर संरक्षण पार्क विकसित करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि शिमला के समीप तारादेवी में पहला वानर संरक्षण पार्क खोल कर इसका शुभारम्भ किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार लोगों की धार्मिक भावनाओं के प्रति भी सजग है तथा साथ ही किसानों की फसलों को बन्दरों एवं अन्य जंगली जानवरों से बचाने के प्रति वचनबध्द है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार इस प्रयास में श्रध्दालुओं के सहयोग का भी स्वागत करेगी जो इन वानर संरक्षण पार्कों में वानरों को प्राकृतिक आहार उपलब्ध करवाने के इच्छुक हों। उन्होंने कहा कि बन्दरों की नसबंदी भी की जा रही है और बन्दरों को पकड़ने के लिए स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है ताकि इन बन्दरों को वानर संरक्षण पार्कों में रखा जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार का यह निर्णय पार्टी के चुनावी घोषणा पत्र के अनुरूप है। उन्होंने वन्य प्राणी अधिकारियों को निर्देश दिए कि वानर संरक्षण पार्क में वानरों की उचित व्यवस्था करें ताकि आस-पास के क्षेत्रों में किसानों की सफलों को बचाया जा सके।
इस अवसर पर वन मंत्री श्री जे.पी. नड्डा, विधायक सर्वश्री सोहन लाल एवं विरेन्द्र कंवर, अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री अवय शुक्ला, उपायुक्त शिमला श्री जे.एस. राणा, प्रधान प्रमुख अरण्यपाल डा. पंकज खुल्लड़, निदेशक भाषा, कला एवं संस्कृति डा. प्रेम शर्मा तथा अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।
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