रायपुर, 15 मई 2008 छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी में आज छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाएं चुनौतियां एवं समाधान विषय पर आयोजित संगोष्ठी का शुभारंभ छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी के महानिदेशक श्री बी.के.एस.रे ने किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि ग्राम स्वास्थ्य समितियों एवं स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में व्याप्त अंध विश्वास एवं कुरितियों को दूर करने का प्रयास भी किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि संगोष्ठी में विशेषज्ञों से प्राप्त सुझावों पर अमल किया जाना चाहिए। संगोष्ठी से प्राप्त सुझावों को, स्वास्थ्य सेवाओं संबंधी समस्याओं के समाधान, प्रशासनिक व्यवस्था, स्वास्थ्य के प्रति ग्रामीण सहभागिता, ग्रामीणों की जागरूकता आदि पर उपयोग होना चाहिए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में बहुत कुछ करने की जरूरत है।
संगोष्ठी के उद्धाटन सत्र के मुख्य वक्ता लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण एवं चिकित्सा विभाग के सचिव, श्री आर.एस.विश्वकर्मा ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग का मुख्य कार्य आम जनों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने बताया कि बहुत पहले लोग केवल सरकारी अस्पतालों पर निर्भर रहते थे। बाद में निजी अस्पतालों का चलन हुआ और अच्छी सुविधाओं के कारण लोग निजी अस्पतालों में अपना इलाज कराने लगे हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी क्षेत्र के अस्पतालों में भी निजी क्षेत्र के अस्पतालों जैसी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में दस हजार ग्राम पंचायतों में स्वास्थ्य सुविधाओं के विकास हेतु भारत सरकार और छत्तीसगढ़ शासन द्वारा राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन प्रारंभ की किया गया है। इसके तहत गांवों के एक-एक व्यक्ति को स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में प्रशिक्षण दिया जाकर, उन्हें उपकरण और दवाईयां उपलब्ध करायी जा रही है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य अमलों के रहने की व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि जिलों में 95 प्रतिशत लोग सरकारी जिला अस्पताल में अपना इलाज कराते हैं। उन्होंने बताया कि राज्य में डाक्टरों के रिक्त पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया जारी है। नया मेडिकल कालेज खोलने के साथ ही पुराने कालेजों में सीटें बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन सब प्रयासों के माध्यम से राज्य में चिकित्सकों की कमी को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य के प्रत्येक जिले में एक-एक मोबाईल चिकित्सालय की व्यवस्था की जा रही है। यह चिकित्सालय गावों के साथ ही गांवों में लगने वाले साप्ताहिक हाट-बाजारों में जाएगा और जरूरतमंदों का उपचार करेगा। इसके अतिरिक्त पंचायतों में ग्राम स्वास्थ्य समिति का गठन किया गया है। प्रत्येक समिति को दस-दस हजार रूपये की राशि प्रदान की जाती है। स्वास्थ्य समिति इस राषि से गांवों में स्थापित हैण्डपंपों के समीप साफ-सफाई, नाली निर्माण, सफाई आदि का कार्य करा सकते हैं। यह कार्य जन-सहभागिता के माध्यम से ही संभव हो सकता है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा गत चार सालों में संजीवनी कोष से गरीबों को ईलाज के लिये 20 करोड़ रूपये उपलब्ध कराया गया है। सचिव श्री विष्वकर्मा ने बताया कि प्रत्येक गरीब परिवार को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य बीमा योजना भी लागू किया जा रहा है।
संगोष्ठी का संचालन शासकीय छत्तीसगढ़ महाविद्यालय के लोक प्रशासन विभाग के प्राध्यापक श्री महेश कुमार शर्मा ने किया। श्री शर्मा ने स्वास्थ्य सेवाओं में मानवीय संवेदना को सबसे महत्वपूर्ण बताया। संगोष्ठी में छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाएं, छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित समस्याएं एवं उनका समाधान और स्वास्थ्य सेवाओं में भारतीय चिकित्सा पध्दति का योगदान विषय पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा। संगोष्ठी में डॉ. आर.के.राजमणी, डॉ. प्रमोद सिंह, डॉ.जी.एस.बदेशा सहित बड़ी संख्या में प्रतिभागी उपस्थित थे।
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