खिलाड़ियों की शिक्षा और नौकरी के लिए बने आरक्षण नीति

रायपुर, 12 मई 2008 - राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में पदक प्राप्त करने वाले छत्तीसगढ़ के युवा एवं प्रतिभावान खिलाड़ियों को राज्यपाल श्री ई.एस.एल. नरसिम्हन ने छत्तीसगढ़ खेल शिखर अलंकरण, छत्तीसगढ़ खेल गौरव अलंकरण एवं छत्तीसगढ़ खेल अंकुर अलंकरण से सम्मानित किया। खिलाड़ियों संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि यह खुशी की बात है कि छत्तीसगढ़ के इतने अधिक खिलाड़ियों ने न केवल राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लिया बल्कि विजेता बनकर पदक भी हासिल किया। उन्होंने कहा कि यह अलंकरण समारोह राज्य के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के गौरव को पहचान देने का ही एक प्रयास है। उन्होंने यह भी आशा व्यक्त की कि राज्य के खिलाड़ी न केवल छत्तीसगढ़ राज्य में बल्कि राष्ट्रमंडल खेलों, एशियाड और ओलम्पिक खेलों में भी पदक हासिल कर छत्तीसगढ़ राज्य का गौरव बढ़ायेंगे।

यह अलंकरण समारोह राज्य शासन के खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा आयोजित किया गया था। इसके अंतर्गत राज्य के 243 सब जूनियर, जूनियर एवं सीनियर वर्ग के राष्ट्रीय पदक विजेता खिलाड़ियों को सम्मानित किया गया। राज्यपाल ने अपने संबोधन में आगे कहा कि राज्य के खेल मंत्री प्रतिभावान एवं ऊर्जावान है। उन्होंने खेलों के विकास के लिये अनेक योजनाएं बनाई है। उन्होंने कहा कि राज्य के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के हित के लिए हमें बहुत कुछ करना है। खेल जीवन का एक छोटा सा हिस्सा है। खिलाड़ियों को चाहिए कि वे केवल खेल पर ही आगे नहीं बढ़े, बल्कि खेलों के साथ वे अपनी पढ़ाई भी पूरी करे, क्योंकि शिक्षा के बिना उन्हें सही राह नहीं मिल सकती। उन्होंने कहा कोई भी खिलाड़ी अपनी पूरी जिंदगी खेल में नहीं बीता सकता। एक समय के बाद उन्हें खेलना बंद करना होता है। राज्यपाल ने कहा कि इसी कारण यह जरूरी है कि प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को न केवल नौकरियों एवं सेवाओं में आरक्षण देते हुए उनके लिए स्थान सुरक्षित रखा जाए बल्कि उन्हें अच्छी शिक्षा प्राप्त करने के लिए भी आरक्षण नीति बनाई जाए।

राज्यपाल ने कहा कि खिलाड़ियों के प्रति हमारी प्रतिबध्दताएं है और हमें अपनी इन जिम्मेदारियों को पूरा भी करना है। उन्होंने कहा कि मेरी इच्छा है कि आने वाले वर्षों में जब मैं खिलाड़ियों के अलंकरण समारोह में पहुंचू तो मुझे यह भी जानने का अवसर मिले कि आरक्षण की नीति से शिक्षा के क्षेत्र और सेवाओं के क्षेत्र में कितने खिलाड़ियों को लाभ मिला है। उन्होंने कहा कि मेरी यह भी जानने की मंशा है कि राज्य के विकासखंडों में बने स्टेडियमों का उपयोग कहां-कहां हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि स्टेडियमों को खाली नहीं होना चाहिए बल्कि खिलाड़ियों से भरा होना चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि वे आने वाले समय में स्वयं भी जिलों में भ्रमण के दौरान स्टेडियम पहुंचेंगे और खेल सुविधाओं एवं आधारभूत संरचनाओं का अवलोकन करेंगे।

राज्यपाल ने कहा कि राज्य के खेल संघों एवं विभाग द्वारा ऐसे प्रयासों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए जिससे छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय खेल अधिक से अधिक हो। खेल वातावरण को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने छत्तीसगढ़ में नेशनल गेम आयोजित करने पर बल दिया। उन्होंने यह भी कहा कि मैं यह भी जानना चाहता हूं कि आगामी राष्ट्र मंडल (कामन वेल्थ) खेलों में छत्तीसगढ़ राज्य की क्या तैयारी है, कौन से प्रयास किए जा रहे हैं और यहां की टीम का स्वरूप कैसा है। उन्होंने देश के खेल मानचित्र पर छत्तीसगढ़ का नाम प्रभावी तरीके से अंकित करने पर बल दिया।

प्रदेश के खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने पदक विजेता खिलाड़ियों को बधाई देते हुए कहा कि हमारी युवा पीढ़ी ने राष्ट्र स्तर पर पदक हासिल कर प्रदेश का नाम रोशन किया है। उन्होंने कहा वर्तमान समय में देखा जा रहा है कि युवाओं का रूझान पश्चिमी जीवन शैली के प्रति बढ़ा है। टेलीविजन के प्रति आकर्षण बढ़ा है। जितना समय बच्चे और युवा टेलीविजन के लिए देते हैं, उसका 10 प्रतिशत भी खेलों के मैदान के लिए नहीं देते। उन्होंने बच्चों और युवाओं को आह्वान किया कि वे खेल के मैदान पर उतरे। खिलाड़ी, अपने गांव, राज्य एवं देश का एम्बेसडर होता है, इससे गांव, राज्य तथा देश का गौरव बढ़ता है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ्य शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निर्माण होता है और स्वस्थ मस्तिष्क से ही स्वस्थ देश का निर्माण होता है। खेल मंत्री ने कहा कि माता-पिता सहित हम सबका दायित्व है कि अपनी युवा शक्ति को मैदानों में उतरने के लिये प्रेरित करे।
श्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य में खिलाड़ियों के उत्थान के लिये अनेक प्रयास किये प्रारंभ किए गए हैं। उत्कृष्ट खिलाड़ियों को शासकीय नौकरी में लेने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। राज्य शासन द्वारा प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले खिलाड़ियों को आने-जाने एवं भोजन का खर्चा वहन किया जाता है। ग्रामीण अंचलों में खेल प्रतिभाओं को सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से राज्य के हर गांव में पांच एकड़ भूमि खेल मैदान के रूप में सुरक्षित रखने एवं विकसित करने का निर्णय लिया गया है। इसके लिये राज्य के लगभग तीन हजार गांवों में भूमि सुरक्षित कर लिया गया है और इनके समतलीकरण करने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य के 70 विकासखंड़ों में 25 लाख की लागत से स्टेडियम बनकर तैयार हो चुके हैं। उन्होंने खिलाड़ियों को आवश्सत किया कि उन्हें राज्य शासन की ओर से पूरा सहयोग दिया जायेगा।

समारोह को राज्य ओलंपिक संघ के अध्यक्ष डॉ. अनिल वर्मा ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि खेल में जीत महत्वपूर्ण है लेकिन इससे भी ज्यादा महत्व है खेल भावना का विकास। उन्होंने खिलाड़ियों से कहा कि वे नौकरियों को अपने लक्ष्य का अंतिम लक्ष्य नहीं बनाये बल्कि वे खेल के क्षेत्र में अपने नये क्षितिज स्थापित करें।

खेल एवं युवा विभाग के सचिव श्री पी.सी. दलेई ने स्वागत भाषण में कहा कि प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का अलंकरण प्रेरणा का स्रोत बनता है। इस अलंकरण समारोह में ग्रामीण खेलों से दो तथा राष्ट्रीय युवा उत्सव के छह कलाकारों को भी पुरस्कृत किया जा रहा है। खेल एवं युवा कल्याण विभाग के संचालक श्री राजेश मिश्रा ने विभागीय प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2004 में राष्ट्रीय खेलकूद प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ राज्य के खिलाड़ियों ने चार प्रतिस्पध्र्दाआें में पदक अर्जित किया था। पिछले राष्ट्रीय खेलकूद प्रतियोगिता में राज्य के खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए 15 खेल स्पध्दाओं में पदक जीता। आज यहां इन खिलाड़ियों को प्रोत्साहित देने के उद्देश्य से लगभग 29 लाख 90 हजार रूपये की नकद राशि से पुरस्कृत किया जा रहा है। कार्यक्रम के अंत में खेल एवं युवा कल्याण विभाग के उप संचालक श्री शर्मा ने आभार व्यक्त किया।

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