किसान खेती के साथ-साथ अन्य काम धंधे भी अपनायें

जयपुर, राजस्‍थान - उद्योग मंत्री डा.दिगम्बर सिंह ने कहा है कि प्रतिस्पर्धा के इस दौर में जब खेती लाभ का कार्य नही रहा तो आवश्यक है कि किसान खेती के साथ अन्य कामधन्धे अपनाये और कृषि उत्पादों पर आधारित छोटे छोटे उद्योग लगायें।

उद्योग मंत्री शनिवार 01.03.08 को भरतपुर जिले के कृषि विज्ञान केन्द्र कुम्हेर पर आत्मा योजनान्तर्गत आयोजित कृषि मेले एवं प्रदर्शनी के अवसर पर सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने फल-फूल-सब्जी प्रदर्शन और कृषि प्रदर्शनी का उद्धाटन कर अवलोकन किया और राजस्थान आजीविका मिशन के तहत निर्मित युवा कृषक छात्रावास का लोकार्पण भी किया। उन्होंने किसान को देश की रीढ़ बताते हुए कहा कि किसान कृषि की आधुनिकतम तकनीक एवं कृषि के नये शोधों व उपकरणों के प्रति जागरूक रहें और परम्परागत खेती की बजाय कम लागत की अधिक लाभ लेने वाली फसलें लें। उन्होंने राज्य में पाले से खेती में हुए नुकसान की चर्चा करते हुए कहा कि केन्द्र से कोई सहायता नहीं मिलने के बावजूद राज्य सरकार ने अपने स्तर पर पाला पीड़ित किसानों के लिए 126 करोड़ का प्रावधान रखा है और जिन खेतों में 50 प्रतिशत से अधिक खराबा होगा उन्हें नियमानुसार मुआवजा राशि वितरित की जायेगी।

डॉ. सिंह ने विगत चार वर्षों में चिकित्सा के साथ ही अन्य क्षेत्रों में राज्य व जिलों में हुए अतुलनीय विकास की चर्चा करते हुए कहा कि जननी सुरक्षा योजना की तर्ज पर शिशु सुरक्षा योजना भी भरतपुर सहित तीन जिलों में प्रारम्भ की गई है जिसके तहत जिले को करीब 150 करोड़ रुपये की राशि मिलेगी। उन्होंने क्षेत्रा की जनता को अपनी ताकत बताते हुए कहा कि उनका प्रयास है कि सिमको फैक्ट्री आगामी दो माह में खुले और अन्य बन्द उद्योग भी शीघ्र खुलवाये जायें। उन्होंने कहा कि कुम्हेर के पास शीघ्र ही औद्योगिक क्षेत्रा विकसित कराने की कार्रवाई प्रारम्भ की जायेगी ताकि इस क्षेत्रा के बेरोजगारों को रोजगार मिल सके। उन्होंने कहा कि संभाग का दर्जा मिलने के बाद जिला मुख्यालय पर इन्जीनियरिंग कालेज एवं मेडिकल कालेज खुलने से निश्चय ही जिले के विकास को नई दिशा मिलेगी और जिले में तकनीकी शिक्षा के प्रति अच्छा वातावरण निर्मित होगा।

समारोह की अध्यक्षता करते हुए नगर परिषद अध्यक्ष श्री शिवसिंह भोंट ने कहा कि हमेशा पिछड़ा रहने वाला भरतपुर जिला विगत चार वर्षों के प्रयासों के पश्चात अब विकास की दौड़ में शामिल है और जिले में चहुँमुखी विकास अब दृष्टिगोचर होने लगा है। समारोह में कृषि विज्ञान केन्द्र के प्रभारी प्रो. सी एल देशवीर ने किसानों से अन्धाधुन्ध उर्वरक एवं रसायनों का प्रयोग नहीं करने का आग्रह करते हुए कहा कि वे 50 प्रतिशत रसायन एवं 50 प्रतिशत जैविक खाद का प्रयोग करें ताकि उनकी जमीन उपजाऊ बनी रहे।

प्रारम्भ में उप निदेशक कृषि श्री देशराज सिंह ने आत्मा योजना एवं मेले के संबध में विस्तार से जानकारी देते हुए सिंचाई की नई पाईप लाईन,फव्वारा व बून्द बून्द सिंचाई पध्दति और कृषि की नवीनतम तकनीक अपनाने का आग्रह किया। अन्त में संयुक्त निदेशक कृषि श्री आर.सी.शर्मा ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि ने फल-फूल-सब्जी प्रतियोगिता के विजयी प्रतिभागियों एवं प्रगतिशील किसानों को पुरस्कृत भी किया।

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