विधि और न्याय मंत्रालय के अनुसार निर्वाचन की अधिसूचना की तारीख से आरंभ करके और निर्वाचन के अंतिम चरण में मतदान के पूरा होने तक किसी ओपीनियन पोल के परिणामों को प्रकाशित और उनका प्रसार करने का प्रतिषेध करते हुए लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 में विनिर्दिष्ट उपबंध करने की आवश्यकता के लिए सिफारिश करते हुए एक्जिट पोल को वर्जित करने संबंधी निर्वाचन आयोग द्वारा एक प्रस्ताव सरकार को अग्रेषित किया गया था ।
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