रायपुर, 21 अप्रैल 2008 मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने इस वर्ष के ग्राम सुराज अभियान के प्रथम दिवस पर आज बैसाख महीने की तपती हुई दोपहरी में राज्य के घनघोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र जगरगुण्डा (जिला दक्षिण बस्तर) और उसूर (जिला बीजापुर) सहित बस्तर (जगदलपुर) जिले के ग्राम सीतलावण्ड पहुंचकर वहां की जनता को यह विश्वास दिलाया कि प्रदेश सरकार हर कदम पर उनके साथ है।
गौरतलब है कि देश की आजादी के बाद जगरगुण्डा और उसूर के लोगों ने तो आज पहली बार किसी मुख्यमंत्री को अचानक अपने बीच पाया। यह सचमुच उनके लिए एक नया और सुखद अनुभव था, जब वे दो करोड़ से अधिक आबादी वाले अपने राज्य के मुखिया से आमने-सामने बेहद आत्मीय वातावरण में बातचीत कर रहे थे।

Jagargunda
उल्लेखनीय है कि आदिवासी बहुल बस्तर अंचल के इन तीनों गांवों में मुख्यमंत्री ने आज ग्रामीणों के बीच चौपाल शैली में बैठ कर उनका दुख-दर्द सुना। जगरगुण्डा और उसूर के पिछड़ेपन को मुख्यमंत्री ने काफी गहराई से महसूस किया और ग्रामीणों को उनकी बेहतरी के लिए अनेक जरूरी घोषणाओं के साथ लगभग 36 करोड़ रूपए लागत की दो सीमेंट कांक्रीट सड़कों की सौगात देकर उनमें एक नयी आशा का भी संचार किया। मुख्यमंत्री ने जगरगुण्डा के राहत शिविर में अरनपुर से नकुलनार, जगरगुण्डा और चिंतलनार होते हुए ग्राम दोरनापाल तक 75 किलोमीटर सीमेंट कांक्रीट सड़क निर्माण की घोषणा की और बताया कि इस मार्ग के निर्माण पर तीस करोड़ रूपए खर्च किए जाएंगे।
जगरगुण्डा के बाद मुख्यमंत्री डॉ. सिंह आंध्रप्रदेश की सीमा से लगे हुए ग्राम उसूर (जिला बीजापुर) पहुंचे, जहां उन्होंने आवापल्ली से बासागुड़ा तक छह करोड़ रूपए की लागत से 17 किलोमीटर लम्बी सीमेंट कांक्रीट सड़क निर्माण की घोषणा की। उसूर में भी मुख्यमंत्री ने नक्सल हिंसा से पीड़ित और सलवा जुडूम आंदोलन से जुड़े ग्रामीणों के राहत शिविर में उनकी विभिन्न समस्याओं की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने आज ही बस्तर (जगदलपुर) जिले के बकावण्ड विकासखण्ड के ग्राम सतलावण्ड का भी आकस्मिक दौरा किया, जहां उन्होंने ग्रामीणों के आग्रह पर राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी योजना के तहत दस लाख रूपए लागत के नये तालाब निर्माण और इस ग्राम पंचायत के आश्रित गांव मगवागुड़ा और भकवागुड़ा में हैंडपम्प तथा विद्युतीकरण की मंजूरी दी।
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